मैं लिख रहा हु या लोगो ने पढ़ना छोड़ दिया है!
मैं लिख रहा हु मैं लिख रहा हु या लोगो ने पढ़ना छोड़ दिया है ! ये सवाल बड़ा कठीन हैं जहाँ मैं लिखना शुरू करता हु तो, लोग मुझे एक कहानी की तरह छोड़ देते हैं! मैं सवाल भी हूँ ,और जवाब भी ढूंढ रहा हूँ , मैं खामोश हूँ या लफ़्ज़ों से खेल रह हूँ ! नम आँखे कर लेता हूँ जब मैं कलम रोक लेता हूं , वहाँ वह कुछ लोग कहानी की शुरुआत पूछते है। मैं लिखना भी अधूरा छोड़ रहा हु, पू रा करने की वजह ढूंढ रहा हु,! शब्दों को रोक रहा हु, पता नहीं शब्दों से दूर भाग रहा हु। कभी कभी लगता है नींद कहीं खो सी गयी हो , और दिल सो रहा हो ! माना वक्त के साथ हूँ मैं पर उस वक्त में भी खुद से बिछड़ने लगा हु जैसे खु शियों से मिलना ना हो रहा हो! लफ्जो से खफा हो रहा हूं, रूबरू मैं अपने आप से जो हो रहा हूं !